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Showing posts from 2020

किसान मसीहा बाबा टिकैत

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आज पूरी दुनिया कोरोना नामक महामारी से लड़ रही है, पिछले 52-53 दिनों से पूरा देश घरों में बंद है। फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं, उद्योग धंधे ठप पड़े हैं, बाजार सुनसान हैं पर इस महामारी के बीच भी डॉक्टर, जवान और किसान लगातार डटे हुए हैं। इस महामारी ने आधुनिक होते भारत को किसान का महत्व समझा दिया। इस महामारी में भी किसान देश का पेट भरने का काम कर रहा है। पर जो किसान विषम से विषम परिस्थिति में पेट भरता है, जब वो कर्ज़ से तंग आकर आत्महत्या करता है तो दिल दहल जाता है। अगर आज देश में ‌‌किसानों की बदतर स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण एकता का अभाव और वर्तमान भारत में सभी किसानों को साथ लेकर चलने वाले किसान नेता का कमी है। जब भी भारत में किसान राजनीति और किसान एकता की बात होती है तो चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत का जिक्र जरूर होता है। अपने किसान आंदोलनों  से लखनऊ से लेकर ‌‌‌‌‌‌‌‌‌दिल्ली तक की कुर्सी हिलाने वाले किसान नेता चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की आज 9वीं पुण्यतिथि है।                    चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत चौधरी म...

हुड्डा के सामने झुकी कांग्रेस

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मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी में क्षत्रपों की लड़ाई बढ़ती जा रही है। चाहे वो हरियाणा, पंजाब हो या राजस्थान, छत्तीसगढ़। हर जगह कांग्रेस के कद्दावर नेता एकदूसरे के सामने खड़े हैं।   ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद हर राज्य में विरोध की आवाज उठने लगी है, कहीं बगावत की तैयारी चल रही है तो कहीं आलाकमान के सामने शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है।       (भूपेन्द्र सिंह हुड्डा चुनावी रैली में, फाइल फोटो)  कांग्रेस में नेताओं की खींचतान जो अंदरखाने चल रही थी, राज्यसभा चुनाव में सामने आ गई। जहां मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सुरक्षित सीट न मिलने के कारण कांग्रेस छोड़ दी तो वहीं हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपने पुत्र के लिए विधायकों को अपने साथ लामबंद कर कांग्रेस आलाकमान को हिला दिया।       (कुमारी शैलजा संसद परिसर मेें, फाइल फोटो)  दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, दीपेन्द्र हुड्डा, कुमारी शैलजा से लेकर अशोक तंवर जैसे सारे बड़े का...

बेमौसम बारिश, बेहाल किसान

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"भाई फसल ठीक-ठाक हो जाती तो बैंक का कुछ कर्ज उतार देते पर अब तो लग रहा है ऊपरवाला सारी फसल खत्म करके ही मानेगा"  यह दर्द एक किसान का नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तरप्रदेश और हरियाणा के लगभग सभी किसानों का है जिनकी फसलें बेमौसम बारिश ने बर्बाद कर दी हैं। दरअसल बेमौसम बारिश ने लगभग पूरे उत्तर भारत में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। मार्च में लगातार हो रही बारिश ने सरसों, आलू, गेहूँ, मटर सहित सहित सभी फसलों को बर्बाद कर दिया है। देश का अन्नदाता किसान रो रहा है और बस यही दुआ कर रहा है कि ये बारिश और ना हो।                       (ढ़ही हुई सरसों की फसल)  इस ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में सरसों की फसल लगभग बर्बाद हो गई है। यह समय सरसों की फसल की कटाई का है, पर फसल कटने से पहले ही सरसों खेत में ही झड़ चुकी है और जो बची भी है वो पूरी ढ़ह चुकी है।                    (आलू के खेत मेें भरा हुआ पानी)  होली के आसपास का मौसम आलू की ...

खून से लथपथ राजधानी

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कल लोकसभा में दिल्ली दंगों पर जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ये दंगे सुनियोजित तरीके से कराए गए, पर इतना कहकर गृहमंत्री पुलिस की नाकामयाबी पर पर्दा नहीं डाल सकते। अगर ये दंगे सच में सुनियोजित थे तो बड़ा सवाल उठता है  खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थी।                 (अमित शाह, चित्र - लोकसभा टीवी) जल गई राजधानी सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार लगातार कई दिन तक शाहीन बाग गए, उन्होंन वहाँ प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। गतिरोध बढ़ता चला गया, ज़ाफराबाद में प्रदर्शनकारियों ने सड़क बंद कर दी।                  (जलती राजधानी, चित्र - द हिन्दू)  ज़ाफराबाद रोड़ बंद हो गया, दिल्ली में चुनाव हारी भाजपा को इसमें शाहीन बाग - 2 दिख गया। भाजपा नेता कपिल मिश्रा दल-बल के साथ रोड़ खाली करवाने जाफराबाद पहुंच गए और नेताजी ने अल्टीमेटम दे दिया।                  (कपिल मिश्रा,...

बिहार में चढ़ते चुनावी रंग

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बिहार में चढ़ते चुनावी रंग हाल ही में बिहार विधानसभा के बजट सत्र में एनआरसी और एनपीआर को लेकर एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया । क्योंकि जनसंख्या व नागरिकता केन्द्रीय सूची के विषय हैं इसलिए इस प्रस्ताव में बिहार विधानसभा ने केन्द्र से एनआरसी लागू नहीं करने और एनपीआर को 2010 के  प्रारूप के अनुसार करने की मांग की है।  वैसे तो कई राज्यों में सीेएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं पर बिहार में जदयू-भाजपा की गठबंधन सरकार है तो एनआरसी - एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव आम बात नहीं रह जाती।                              (फाइल फोटो)  बिहार में इस वर्ष साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो राजनीतिक सरगर्मियाँ जोरों पर हैं क्योंकि नीतीश कुमार ने एनआरसी का विरोध करके अपने तेवर दिखा दिए हैं।  दिसंबर 2018 से भाजपा एक के बाद एक राज्य में विधानसभा चुनाव हारती जा रही है। अब नीतीश कुमार के बगावती तेवरों ने भगवा दल की चिन्ताएं बढ़ा दी हैं। बिहार के इस विधानसभा सत्र में...