बेमौसम बारिश, बेहाल किसान
"भाई फसल ठीक-ठाक हो जाती तो बैंक का कुछ कर्ज उतार देते पर अब तो लग रहा है ऊपरवाला सारी फसल खत्म करके ही मानेगा"
यह दर्द एक किसान का नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तरप्रदेश और हरियाणा के लगभग सभी किसानों का है जिनकी फसलें बेमौसम बारिश ने बर्बाद कर दी हैं।
दरअसल बेमौसम बारिश ने लगभग पूरे उत्तर भारत में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
मार्च में लगातार हो रही बारिश ने सरसों, आलू, गेहूँ, मटर सहित सहित सभी फसलों को बर्बाद कर दिया है। देश का अन्नदाता किसान रो रहा है और बस यही दुआ कर रहा है कि ये बारिश और ना हो।
इस ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में सरसों की फसल लगभग बर्बाद हो गई है। यह समय सरसों की फसल की कटाई का है, पर फसल कटने से पहले ही सरसों खेत में ही झड़ चुकी है और जो बची भी है वो पूरी ढ़ह चुकी है।
होली के आसपास का मौसम आलू की खुदाई का भी होता है पर ज्यादातर खेतों से आलू की खुदाई अभी नहीं हुई है क्योंकि होली से पहले हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया था। अभी खेत गीले ही थे कि दोबारा हुई बारिश से आलू खेतों में ही गलने लगे हैं।
इस मौसम से खेतों में लहरा रही हरी-भरी गेहूँ की फसल ढ़ह चुकी है, उसकी बालियां ओलावृष्टि से टूट चुकी हैं। पानी खेतों में भरा है, बारिश हो रही है, फसल के गलने का खतरा भी बना हुआ है।
यह बर्बादी सिर्फ आलू, सरसों, गेहूँ तक सीमित नहीं है बल्कि हर फसल का यही हाल है।
अधिकारियों के रवैये से नाराज़गी
हालांकि राज्य सरकारें किसानों को फसलों की बर्बादी की पूर्ति के लिए मदद की बात तो कह रही हैं। किसानों की शिकायत यह भी है जो अधिकारी फसल का निरीक्षण करने आते हैं वो किसानों का नुकसान वास्तविक नुकसान से बहुत कम आंकते हैं।
आगे क्या पड़ेगा जीवन पर असर
किसान की फसल उसके सामने बर्बाद हो चुकी है और उसके आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे।
फसल तो बर्बाद हो चुकी है पर बैंक का कर्जा दिन-रात ब्याज सहित बढ़ रहा है।
किसानों ने भी फसल बेचकर आगे कुछ करने के सपने देखे होंगे । किसी ने जवान बेटी की शादी करने की सोची होगी तो किसी ने घर बनाने की।
किसी के घर बूढ़े माँ-बाप की दवाई आनी थी तो किसी के बच्चों के स्कूल की फीस जमा होनी थी तो किसी को रिश्तेदार का भी उधार चुकाना था।
अब किसान करे भी तो क्या करे, ना उसकी ऊपरवाला सुन रहा है ना सरकार।
इस समय किसान पर क्या गुजर रही है यह सिर्फ एक किसान ही समझ सकता है, बाकी अमीरों के लिए तो मौसम सुहाना हो गया है।
किसी ने बेमौसम बारिश के बारे में बड़ा ठीक कहा है -
"कितने गजब रंग समेटे हैं, ये बेमौसम बारिश खुद में, अमीर पकौड़े खाने की सोच रहा हैं तो किसान जहर…"
- यतेन्द्र सिंह पूनिया
भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
सरकार जरूर कोई विशेष राहत कोष की घोषणा करेगी.ऐसी उम्मीद करनी चाहिए.
ReplyDeleteबढ़िया लिखा है.
Accha likha h 👏👏
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