हुड्डा के सामने झुकी कांग्रेस
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी में क्षत्रपों की लड़ाई बढ़ती जा रही है।
चाहे वो हरियाणा, पंजाब हो या राजस्थान, छत्तीसगढ़। हर जगह कांग्रेस के कद्दावर नेता एकदूसरे के सामने खड़े हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद हर राज्य में विरोध की आवाज उठने लगी है, कहीं बगावत की तैयारी चल रही है तो कहीं आलाकमान के सामने शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है।
(भूपेन्द्र सिंह हुड्डा चुनावी रैली में, फाइल फोटो)
कांग्रेस में नेताओं की खींचतान जो अंदरखाने चल रही थी, राज्यसभा चुनाव में सामने आ गई। जहां मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सुरक्षित सीट न मिलने के कारण कांग्रेस छोड़ दी तो वहीं हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपने पुत्र के लिए विधायकों को अपने साथ लामबंद कर कांग्रेस आलाकमान को हिला दिया।
दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, दीपेन्द्र हुड्डा, कुमारी शैलजा से लेकर अशोक तंवर जैसे सारे बड़े कांग्रेसी दिग्गज चुनाव हार गए थे।
इस चुनाव में कांग्रेस से हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजनलाल के पौत्र और बंसीलाल की पौत्री भी चुनाव हार गई।
जब इतने दिग्गज चुनाव हार गए तो खाली हो रही एक राज्यसभा सीट के लिए मारामारी तो होनी ही थी। एक कहावत भी है "एक अनार, सौ बीमार", यह हरियाणा कांग्रेस की राज्यसभा सीट की लेकर हुई उठापठक को देखकर बिल्कुल ठीक लगी।
कांग्रेस आलाकमान जहाँ प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा और विधानसभा चुनाव हार चुके तेजतर्रार प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला में से किसी एक को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रहा था तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा अपने पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा के लिए राज्यसभा सीट चाह रहे थे।
भूपेन्द्र हुड्डा को आलाकमान का रूख दीपेन्द्र के लिए सकारात्मक नहीं लगा तो वो अपने पुराने पैंतरे पर आ गए, हुड्डा ने 31 में से लगभग 26 विधायकों को अपने साथ लामबंद कर आलाकमान को ताकत का अहसास करा दिया।
भूपेन्द्र हुड्डा गुट के नेताओं ने यहाँ तक कह दिया अगर दीपेन्द्र को राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो वे क्राॅस वोटिंग कर देंगे।
(दीपेन्द्र हुड्डा, फाइल फोटो)
जाहिर है 2016 राज्यसभा चुनाव में किरकिरी करवा चुकी कांग्रेस ने बिना कोई जोखिम लिए दीपेन्द्र हुड्डा के नाम की घोषणा राज्यसभा के लिए कर दी।
दीपेन्द्र हुड्डा राज्यसभा तो पहुंच जाएंगे पर हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी और तेज हो जाएगी इसकी पूरी संभावना है।
पुरानी है गुटबाजी की कहानी
वैसे भी हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने तत्कालीन अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने के लिए दिल्ली में डेरा डाल दिया था।
इतना ही नहीं भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अशोक तंवर के न हटाए जाने पर पार्टी तक छोड़ने की धमकी दे डाली थी। उस समय राहुल गांधी के करीबी अशोक तंवर को हटाकर कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और हुड्डा को संतुष्ट करने के लिए उन्हें चुनाव कैंपेन कमेटी के चैयरमैन का पद दिया गया था।
हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की खूब चली और कांग्रेस का प्रदर्शन भी ठीक रहा जिससे हुड्डा गुट चुनाव के बाद कांग्रेस में मजबूत हुआ है।
अशोक तंवर तो अलग-थलग पड़े हैं पर कुमारी शैलजा, भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई, बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी, रणधीर सुरजेवाला जैसे दिग्गज नेताओं की भी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से नहीं बनती।
कांग्रेस पार्टी के लिए बेहतर होगा कि कुमारी शैलजा की प्रदेश संगठन टीम में सभी धड़ों को पद देकर समायोजित करे वरना हरियाणा कांग्रेस में यह आपसी लड़ाई और बढ़ेगी।
-यतेन्द्र सिंह पूनिया
भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
बहुत बढ़िया.
ReplyDeleteआपका धन्यवाद
Deleteविश्लेषण बहुत जबरदस्त , सारगर्भित व व सटीक तरीक़े से किया है ।
ReplyDeleteBhot heee acha likeha hai yatinder singh jii
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